कहना था कुछ , क्या कहना था, जाने क्या कह गयी,
बात जो दिल में थी आज फिर, दिल ही में रह गयी ,
क्यूँ रुक रुक के लिखती हूँ मैं, क्यूँ हकलाऊं इतना,
वो पर्वत सी हिम्मत मेरी रेत सी क्यूँ ढह गयी ?
किस साहिल से टकराऊंगी, छोड़ किनारा अपना,
डरती हूँ जो इस ज्वार में आज अगर बह गयी ...
जैसा था फिर वैसा होगा, भरम ये कैसे पालूँ,
रिश्ते नाते पड़ जाएँ झूठे, जो मैं सच कह गयी,
कितना मुशकिल है अनदेखा कर पाना काँटों को,
जब काँटों में गुल मुस्काया फिर मैं सब सह गयी .....
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Wednesday, June 17, 2009
Friday, September 26, 2008
फिर ज़िन्दगी के दांव पेंच चलने लगे हैं !
किस राह पे हम आज यूँ ही चलने लगे हैं ?
आप ही के रंग में क्यूँ ढलने लगे हैं?
मोम का जिगर है तो बचें जी आग से,
हाय ! क्या करें जो आह से पिघलने लगे हैं ....
गरूर था कि आपको भी अपने सा बना देंगे,
अब ख़ुद को देख , हाथ अपने मलने लगे हैं ...
बताये ये कोई हमें , क्या ठीक , क्या ग़लत है?
फिर ज़िन्दगी के दांव पेंच चलने लगे हैं ....
जी चाहता है आज लिखें यक नया फ़साना ,
आ आ के लफ्ज़ कागजों पे टलने लगे हैं ......
चल फिर कोई ठोकर लगा, कर दे लहू लुहान,
ए ज़िन्दगी हम आज फिर संभलने लगे हैं ,
आपकी,
-अर्चना
आप ही के रंग में क्यूँ ढलने लगे हैं?
मोम का जिगर है तो बचें जी आग से,
हाय ! क्या करें जो आह से पिघलने लगे हैं ....
गरूर था कि आपको भी अपने सा बना देंगे,
अब ख़ुद को देख , हाथ अपने मलने लगे हैं ...
बताये ये कोई हमें , क्या ठीक , क्या ग़लत है?
फिर ज़िन्दगी के दांव पेंच चलने लगे हैं ....
जी चाहता है आज लिखें यक नया फ़साना ,
आ आ के लफ्ज़ कागजों पे टलने लगे हैं ......
चल फिर कोई ठोकर लगा, कर दे लहू लुहान,
ए ज़िन्दगी हम आज फिर संभलने लगे हैं ,
आपकी,
-अर्चना
Monday, August 25, 2008
Every action has an equal & "opposite" reaction !
कह गए थे न्यूटन साहब, एक पते की बात !
चलो आज मैं share करुँ वो बात आपके साथ ....
कहा उन्होंने हर क्रिया की प्रतिक्रिया हमेशा आती है,
क्षमता उतनी ही , पर उसकी दिशा बदल सी जाती है ,
आज जाने दिल में इतना दुःख क्योंकर छाया है,
बात साफ है शायद तूने, किसी बड़ी खुशी को पाया है ,
करुँ क्या मैं उपाय कहो ,भाव रुके न देश,वन, प्रान्तों से ....
पहुँच ही जाते हैं दिल तक , चले न्यूटन के सिद्धांतों से !
मैं खुशी खुशी कांटें ले लूँ जो राह में तेरे फूल है,
जो गम से मेरे तू खुश है, तो दर्द भी मुझे कबूल है !
चलो आज मैं share करुँ वो बात आपके साथ ....
कहा उन्होंने हर क्रिया की प्रतिक्रिया हमेशा आती है,
क्षमता उतनी ही , पर उसकी दिशा बदल सी जाती है ,
आज जाने दिल में इतना दुःख क्योंकर छाया है,
बात साफ है शायद तूने, किसी बड़ी खुशी को पाया है ,
करुँ क्या मैं उपाय कहो ,भाव रुके न देश,वन, प्रान्तों से ....
पहुँच ही जाते हैं दिल तक , चले न्यूटन के सिद्धांतों से !
मैं खुशी खुशी कांटें ले लूँ जो राह में तेरे फूल है,
जो गम से मेरे तू खुश है, तो दर्द भी मुझे कबूल है !
Saturday, August 16, 2008
पराया
दिल में फिर सिहरन सी? किसका ये साया है ?
वीराने दिल में फिर रहने कोई आया है.....
कहता है दिल तुमको हाथों से छूलूं,
डर है न टूटे जो रिश्ता बनाया है.....
मुझपे तो थी , सारी दुनिया की बंदिश,
दिल मेरा तुमपे किस तरह से आया है?
गर है हकीक़त, ये कैसे मैं मानूं,
जो अपना लगा था, वो आँगन पराया है !
मुहब्बत से हम तो सींचे जा रहे थे,
वो प्यारा सा , नन्हा सा पौधा पराया है,
वो कतरा खुशी का जो पाया अभी था,
वो ज़ज्बा, वो कतरा, चमन ही पराया है,
किसे मानें अपना ? किसे अब पराया ?
जो अपना था छूटा, जो आया पराया है ....
हासिल क्या होगा , तुम्हे यार मेरे?
क्यों तुमने मुझको दीवाना बनाया है?
तुम भी तो झुल्सोगे जो हम जलेंगे,
तौबा खुदा ने क्या शोला लगाया है...
चलो उसको ही सौंपें ये कुदरत की बातें,
कैसा लगा जो ये नगमा सुनाया है?
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
वीराने दिल में फिर रहने कोई आया है.....
कहता है दिल तुमको हाथों से छूलूं,
डर है न टूटे जो रिश्ता बनाया है.....
मुझपे तो थी , सारी दुनिया की बंदिश,
दिल मेरा तुमपे किस तरह से आया है?
गर है हकीक़त, ये कैसे मैं मानूं,
जो अपना लगा था, वो आँगन पराया है !
मुहब्बत से हम तो सींचे जा रहे थे,
वो प्यारा सा , नन्हा सा पौधा पराया है,
वो कतरा खुशी का जो पाया अभी था,
वो ज़ज्बा, वो कतरा, चमन ही पराया है,
किसे मानें अपना ? किसे अब पराया ?
जो अपना था छूटा, जो आया पराया है ....
हासिल क्या होगा , तुम्हे यार मेरे?
क्यों तुमने मुझको दीवाना बनाया है?
तुम भी तो झुल्सोगे जो हम जलेंगे,
तौबा खुदा ने क्या शोला लगाया है...
चलो उसको ही सौंपें ये कुदरत की बातें,
कैसा लगा जो ये नगमा सुनाया है?
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दौर-ऐ-इश्क
गुज़र रही थी ज़िन्दगी अपने ही तौर से ,
नज़र लगी किसी की ,मिले हम इश्क-ऐ-दौर से,
हंसने लगी है दर्पण,कलम भी मुस्कुराई,
ये मैं ही हूँ, या मिल रही हूँ शक्श-और से ?
हर वक्त दिल पर मची हुई परछाईयों की चीख!
कैसे करुँ मैं बंद कान हरसू ये शोर से,
दुनिया तो देखती है मेरे गीत का समाँ,
मिल सका है कौन उन गीतों के छोर से ?
मेरी उम्मीद भी है किसी बच्चे की तरह ,
कोई सुने, न सुने , रोये है ज़ोर से !
रिश्तों का क्या भरोसा? अभी हैं अभी नहीं,
पर दुनिया ही बसी है , इस रिश्तों की डोर से !
नज़र लगी किसी की ,मिले हम इश्क-ऐ-दौर से,
हंसने लगी है दर्पण,कलम भी मुस्कुराई,
ये मैं ही हूँ, या मिल रही हूँ शक्श-और से ?
हर वक्त दिल पर मची हुई परछाईयों की चीख!
कैसे करुँ मैं बंद कान हरसू ये शोर से,
दुनिया तो देखती है मेरे गीत का समाँ,
मिल सका है कौन उन गीतों के छोर से ?
मेरी उम्मीद भी है किसी बच्चे की तरह ,
कोई सुने, न सुने , रोये है ज़ोर से !
रिश्तों का क्या भरोसा? अभी हैं अभी नहीं,
पर दुनिया ही बसी है , इस रिश्तों की डोर से !
रूह बोलती है !
कलम नहीं अब तो मेरी रूह बोलती है ,
दीवानगी से अपने आशिकी को तोलती है !
नहीं ख़बर थी हमको महंगा था इतना सौदा ,
ये दिलागी सुकून-ऐ-दिल को मोल्ती है ...
दिल करे दुआ, तुझे भी हो मुहब्बत ,
सुनते हैं , गली गली तेरी नज़रें डोलती है ?
चाहत जो तुझको आए ,तो इस कदर सताए ,
सिलवट वो चादरों पे जैसे राज़ खोलती है...
मिल जाए तुखो मंजिल फिर भी दुआ करेंगे,
इस दर्द-ऐ-गम में दिल तेरी हँसी टटोलती है !
दीवानगी से अपने आशिकी को तोलती है !
नहीं ख़बर थी हमको महंगा था इतना सौदा ,
ये दिलागी सुकून-ऐ-दिल को मोल्ती है ...
दिल करे दुआ, तुझे भी हो मुहब्बत ,
सुनते हैं , गली गली तेरी नज़रें डोलती है ?
चाहत जो तुझको आए ,तो इस कदर सताए ,
सिलवट वो चादरों पे जैसे राज़ खोलती है...
मिल जाए तुखो मंजिल फिर भी दुआ करेंगे,
इस दर्द-ऐ-गम में दिल तेरी हँसी टटोलती है !
Zindagi - ज़िन्दगी
वह रे तेरी धाक ज़िन्दगी !
आईने सी पाक ज़िन्दगी ,
पल में कर दे शहंशाह तो ,
पल में कर दे ख़ाक ज़िन्दगी ...
उनसे मिलना, फिर मिलना , फिर मिलना, मिलते रहना,
नए बहाने मेल जोल के देना तू हर बार ज़िन्दगी ...
सोच सोच कर दिल हँसता है, कैसी ये नादानी है,
फूल पराया है जिसपे आया हमको प्यार ज़िन्दगी !
आईने सी पाक ज़िन्दगी ,
पल में कर दे शहंशाह तो ,
पल में कर दे ख़ाक ज़िन्दगी ...
उनसे मिलना, फिर मिलना , फिर मिलना, मिलते रहना,
नए बहाने मेल जोल के देना तू हर बार ज़िन्दगी ...
सोच सोच कर दिल हँसता है, कैसी ये नादानी है,
फूल पराया है जिसपे आया हमको प्यार ज़िन्दगी !
Friday, August 15, 2008
mausam-e-ashikana - मौसम-ऐ-आशिकाना
था सौदा बड़ा ही ये सस्ता मगर,
दिल के खोने का गम तो हुआ है हमें,
शायरी जैसी अपनी तो उड़ने लगी,
तेरी चाहत ने जबसे छुआ है हमें,
अब ख्वाहिश है जियें जी भर के इसे,
कल रहे न रहे मौसम-ऐ-आशिकाना ,
ये खुदा की है रहमत, तुम जो भी कहो ,
हर किसी को मिले न खुशी का खजाना .....
दिल के खोने का गम तो हुआ है हमें,
शायरी जैसी अपनी तो उड़ने लगी,
तेरी चाहत ने जबसे छुआ है हमें,
अब ख्वाहिश है जियें जी भर के इसे,
कल रहे न रहे मौसम-ऐ-आशिकाना ,
ये खुदा की है रहमत, तुम जो भी कहो ,
हर किसी को मिले न खुशी का खजाना .....
dhadkan - धड़कन
ये कहती है दुनिया , क़दम न बढ़ा ,
नशा ये मुहब्बत का है सर चढा ,
जो चढ़ जाए आए क़यामत की सूरत,
लगे ये जहाँ हर झलक खूबसूरत ,
पर टूटेगा जब तेरे दिल का गुमाँ ये,
तो बन जाएगा हर समाँ बद्नूमां ये,
जो रो ओगे तुम तो ये दुनिया हँसेगी ,
तेरे आंसूओं पे ये ताने कसेगी,
पता है सिला मुझको उल्फत का तब भी !
धड़कता है दिल तुमको देखूं मैं जब भी !
नशा ये मुहब्बत का है सर चढा ,
जो चढ़ जाए आए क़यामत की सूरत,
लगे ये जहाँ हर झलक खूबसूरत ,
पर टूटेगा जब तेरे दिल का गुमाँ ये,
तो बन जाएगा हर समाँ बद्नूमां ये,
जो रो ओगे तुम तो ये दुनिया हँसेगी ,
तेरे आंसूओं पे ये ताने कसेगी,
पता है सिला मुझको उल्फत का तब भी !
धड़कता है दिल तुमको देखूं मैं जब भी !
Phursat - फुर्सत
फुर्सत मिल जाए तुम्हें जो कहीं ,
पूछना इतना नाज़ करती वो क्यों है?
जो वक्त-ऐ-शिकायत का ले वो बहाना ,
उससे कहना दिल में अरमाँ वो भरती ही क्यों है?
फुर्सत ही ने मुझसे कभी ये कहा था,
की भूले से दिल ये लगाना नहीं ,
मिलेगी न फुर्सत जो दिल को लगाया ,
मैं मुहब्बत में थी मैंने माना नहीं...
अब मिला जो सिला दिल लगाने का मुझको ,
मैं रो रो के ढूढूं वो फुर्सत के पल,
हर वक्त एक साया , है नज़रों पे छाया ,
मशरूफ है दिल मेरा आजकल !
पूछना इतना नाज़ करती वो क्यों है?
जो वक्त-ऐ-शिकायत का ले वो बहाना ,
उससे कहना दिल में अरमाँ वो भरती ही क्यों है?
फुर्सत ही ने मुझसे कभी ये कहा था,
की भूले से दिल ये लगाना नहीं ,
मिलेगी न फुर्सत जो दिल को लगाया ,
मैं मुहब्बत में थी मैंने माना नहीं...
अब मिला जो सिला दिल लगाने का मुझको ,
मैं रो रो के ढूढूं वो फुर्सत के पल,
हर वक्त एक साया , है नज़रों पे छाया ,
मशरूफ है दिल मेरा आजकल !
naya naya- नया नया !
जहाँ-ऐ-आरजू में दिल ये गया गया है ,
ये आशिकी का फन भी ज़रा नया नया है...
हैरान हूँ ख़ुद में देख अपने आईने का रंग ,
ऐसे तो कभी थे न मेरे ख्वाईशों के ढंग,
कहते हैं लोग मुझसे कुछ है ज़रूर आज,
खामोश जुबां पर निगाह बयां बयां है ....
नहीं उम्मीद न ही तेरा इंतज़ार है ,
संजीदगी में है या शौकिया ही प्यार है?
खिला है कैसा फूल पत्थरों के गाँव में ,
खंजर तो कई खाए , तीर मयां मयां है !
मेरे खुदा शुकर है तेरा रहम-ओ-करम है ,
गायें तेरे ही गीत जो हाथों में कलम है,
मिले हमें तारीफ़ तेरे बोल जो कहें ,
शर्मिंदगी से दिल ये मेरा स्याह स्याह है....
ये आशिकी का फन भी ज़रा नया नया है.......
judai- जुदाई
मैंने माना की दिल तेरा कायल हुआ है,
बिना कुछ कहे देखो घायल हुआ है ,
अब डर है बढे न फरेबी उमीदें,
चलो रस्ते बदलें, सब ख़्वाबों को सी दें,
जो मुमकिन नहीं तुमको अपना बनाना ,
गवारा नहीं फिर ये दिल का लगाना,
दिल-ऐ-आरजू के वफ़ा की कसम,
अब कभी तुमको आवाज़ देंगे न हम,
कभी गुजरो तुम जो गली से हमार
देखेंगे तुमको चुपके चिल्मन सहारे ,
दुआ है रहे तू हमेशा खुशी से,
जुदा हो रहे हैं तेरी ज़िन्दगी से ....
बिना कुछ कहे देखो घायल हुआ है ,
अब डर है बढे न फरेबी उमीदें,
चलो रस्ते बदलें, सब ख़्वाबों को सी दें,
जो मुमकिन नहीं तुमको अपना बनाना ,
गवारा नहीं फिर ये दिल का लगाना,
दिल-ऐ-आरजू के वफ़ा की कसम,
अब कभी तुमको आवाज़ देंगे न हम,
कभी गुजरो तुम जो गली से हमार
देखेंगे तुमको चुपके चिल्मन सहारे ,
दुआ है रहे तू हमेशा खुशी से,
जुदा हो रहे हैं तेरी ज़िन्दगी से ....
Wednesday, August 13, 2008
आज - aaj!
संभला है दिल बड़ी मुश्किल से आज ,
लो चल दिए उठ के तेरी महफिल से आज ,
तूफाँ में भी कश्ती हँसती रही ,
लो फिर आके टूटा दिल साहिल पे आज ,
समंदर थी दोस्ती आपकी अब ये जाना ,
हर आँसू में खारापन कुछ शामिल है आज,
अब पूछो न मेरी अमीरी के जलवे,
हर आह पे सबकी वाह हासिल है आज,
नहीं खेलना अपने दिल से हमें अब,
ये टूटने के भी नही काबिल है आज !
लो चल दिए उठ के तेरी महफिल से आज ,
तूफाँ में भी कश्ती हँसती रही ,
लो फिर आके टूटा दिल साहिल पे आज ,
समंदर थी दोस्ती आपकी अब ये जाना ,
हर आँसू में खारापन कुछ शामिल है आज,
अब पूछो न मेरी अमीरी के जलवे,
हर आह पे सबकी वाह हासिल है आज,
नहीं खेलना अपने दिल से हमें अब,
ये टूटने के भी नही काबिल है आज !
Thursday, May 8, 2008
Chaand-Chakor- चाँद चकोर
किसी गुलसितां में चहकती थी हरदम ,
दो आंखों में उसकी महकती थी शबनम ,
सभी फूल पाती उसी पर फ़िदा थे ,
जो गूंजे सदा में उसी की सदा थे |
थी लाडो सभी की चहेती चकोर ,
कूदती भागती थी वो चारों ही ओर,
था मासूम दिल ऐसा , भोली सी सूरत ,
थी उसके लिए ये जहाँ खूबसूरत ,
एक दिन जो नज़र आसमान पर पड़ी ,
चाँद के चेहरे से उसकी आँखें लड़ी,
देखती ही रही कुछ भी बोले न वो ,
मुस्कुराये मगर राज़ खोले न वो ,
फिर कहा उसने ये बड़े दांव से,
चाँद ला दो मुझे आसमान गाँव से ,
सब हँसे चल रे पगली जिद नहीं ऐसे करते ,
कभी तारों को देखा है ज़मीं पे उतरते,
अगर वो ज़मीं पे आ सकता नहीं ,
तो में क्यों न ख़ुद ही उस जाऊं वहीँ ,
यहीं तो दिखे है , उठाओ नज़र ,
हाथों से चूलूं , जो बढाऊं अगर ,
सब ये बोले जो दीखता है होता नहीं,
रेत के ढेर में पानी सोता नहीं ,
इश्क़ में कौन दुनिया में रोता नहीं ,
जो समझता है सपने पिरोता नहीं....
न मानी उडी उड़ चली वो चकोर ,
दोनों पंख खोले वो अम्बर की ओर ,
न दिन ही को देखा , न रातों को जाना,
न गर्मी न सर्दी, हवा का ठिकाना ,
जो टूटा बुलंदी से दम आखरी,
तो प्यासी वो आके ज़मीं पे गिरी ,
अपने उजडे पंखों को मींचे हुए
पहुँची प्यासी पोखर साँस खींचे हुए ,
देखा जो पानी में था चाँद एक,
आई जान वापस , दिया मौत फ़ेंक ,
गई वो समझ दुनिया दारी को आज ,
लो तुम भी सुनो उस चकोरी का राज़ ,
जो ख्वाइश करो तुम कभी चाँद की ,
अपने घर में पानी का घडा डालना ,
जो सच्ची हो चाहत झुके आसमां,
हमसफ़र दिल तुम ज़रा बड़ा पालना |
दो आंखों में उसकी महकती थी शबनम ,
सभी फूल पाती उसी पर फ़िदा थे ,
जो गूंजे सदा में उसी की सदा थे |
थी लाडो सभी की चहेती चकोर ,
कूदती भागती थी वो चारों ही ओर,
था मासूम दिल ऐसा , भोली सी सूरत ,
थी उसके लिए ये जहाँ खूबसूरत ,
एक दिन जो नज़र आसमान पर पड़ी ,
चाँद के चेहरे से उसकी आँखें लड़ी,
देखती ही रही कुछ भी बोले न वो ,
मुस्कुराये मगर राज़ खोले न वो ,
फिर कहा उसने ये बड़े दांव से,
चाँद ला दो मुझे आसमान गाँव से ,
सब हँसे चल रे पगली जिद नहीं ऐसे करते ,
कभी तारों को देखा है ज़मीं पे उतरते,
अगर वो ज़मीं पे आ सकता नहीं ,
तो में क्यों न ख़ुद ही उस जाऊं वहीँ ,
यहीं तो दिखे है , उठाओ नज़र ,
हाथों से चूलूं , जो बढाऊं अगर ,
सब ये बोले जो दीखता है होता नहीं,
रेत के ढेर में पानी सोता नहीं ,
इश्क़ में कौन दुनिया में रोता नहीं ,
जो समझता है सपने पिरोता नहीं....
न मानी उडी उड़ चली वो चकोर ,
दोनों पंख खोले वो अम्बर की ओर ,
न दिन ही को देखा , न रातों को जाना,
न गर्मी न सर्दी, हवा का ठिकाना ,
जो टूटा बुलंदी से दम आखरी,
तो प्यासी वो आके ज़मीं पे गिरी ,
अपने उजडे पंखों को मींचे हुए
पहुँची प्यासी पोखर साँस खींचे हुए ,
देखा जो पानी में था चाँद एक,
आई जान वापस , दिया मौत फ़ेंक ,
गई वो समझ दुनिया दारी को आज ,
लो तुम भी सुनो उस चकोरी का राज़ ,
जो ख्वाइश करो तुम कभी चाँद की ,
अपने घर में पानी का घडा डालना ,
जो सच्ची हो चाहत झुके आसमां,
हमसफ़र दिल तुम ज़रा बड़ा पालना |
Shayari- शायरी
शायरी
१. 'चाहिए' और 'चाह' का सिरा तुम न पूछो ,
की दिल और दिमाग का सिला तुम न पूछो ,
जो कह दें की हमने ये दिल से कहा है ,
तो उसकी वजह तुम दिमागों से पूछो !
२. ज़िन्दगी को मिला एक सिरा चाहने का,
वो चाह , जो चाहत है एक सिलसिले की,
फहमी में ग़लत तुम न आना कभी भी ,
ये उल्फत नहीं है , इंसानी दिले की,
मुहब्बत है एक तस्सवुर से मेरे ,
जो मिलता है ले ले के चेहरे नए ,
कभी तो मिले बाहें खोले वो अपने ,
कभी फिर लगाए वो पहरे नए !
३. प्यारा प्यारा प्यार तुम्हारा , प्यारा है इज़हार तुम्हारा ,
दो पल ही , हुआ तो सही , हल्का इक दीदार तुम्हारा ,
तुम आए , तुम यूँ आए , रहा रात झंकार तुम्हारा ,
कुछ तुमने भी दिया हौसला , कुछ दिल गुनाहगार तुम्हारा ....
४. अब आया जीने में मज़ा , बूँदें बरसी अश्कों की अभी,
रही न रहो पास मेरे, यादें मिलती हैं, जो तुमको देखूं कभी ...
५. हँसता है दिल, मुस्कुराती हूँ मैं,
अब हरदम तेरे गीत गाती हूँ मैं,
जो पुकारो मुझे दौडी आती हूँ मैं ,
अब शाम-ओ-सेहर गुनगुनाती हूँ मैं ...
६. कागज़ पे लिखा था शेरों को तुमने,
या दिल पे मेरे कोई नगमा खुदा था ,
जो आया था मिलने ज़रा वक्त पहले ,
था साया मेरा ही या मुझसे जुदा था ?
७.दिल धड़कता तो था पर ऐसे नहीं ,
सांसें चलती तो थी, इस जैसे नहीं ,
किया जादू है कैसा ये तुमने सनम ,
जी थी मैं, हूँ लगती वैसी नहीं !
८. गुज़रता है दिन खुमारी में ,
कट ती है रात बेक़रारी में ,
जाने खुदा वक्त कैसा वो होगा ,
रहती हूँ मैं जिसकी तैयारी में !
९. कैसा ये गुमाँ हमें है आजकल ,
की रहते हैं दुनिया में लोग आज भी,
हमने मौसम से ज़्यादा दिल देखे बदलते,
हम यहीं हैं, कहते हिं लोग आज भी !
१०. गर वक्त-ऐ-शिकायत से आन आना न था,
तौबा इस से बेहतर बहाना न था ?
११. डर है फिर इस्क्ह की सज़ा न मिले ,
हर अदा में छुपा कातिलाना ज़हर ,
ज़रा धीरे धड़क ए मेरे प्यासे दिल,
तुझसे पहले न जाएँ ये साँसें ठहर !
१२.शुक्रिया दोस्त गुल-ऐ-दिल को खिलाया ,
ग़ज़ल से हमारे हमीं को मिलाया ,
न मुमकिन था पाना , गम-ऐ-आशिकाना ,
न जाने जहर क्या हमें है पिलाया !
१३. क्या ग़ज़ल, शायरी भी न भाये हमें,
अब तो हरसू नज़र तू ही आए हमें,
क्या करें ? तुम कहो, दिल गया हाथ से ,
अब तो देखेंगे , जो दिल दिखाए हमें ....
१४ . ज़िन्दगी में कभी मैं तुमसी बन सकूं,
खुल के रोऊँ , कभी खुल के मुस्का सकूं,
ये दिखावे का चेहरा , अब भाता नहीं,
कैसे फेंकूं मगर मुझको आता नहीं.....
१५. निकल हम पड़े हैं , अपनी ही धुन में आज ,
अब देखें जो भी मंज़र , आए निगाह में,
ख़ुद क्या बताएं , फूल या काँटों का बचपना ,
सब बिछ गए हैं आज किस्मतों की राह में ....
१६ मिल सकते हैं क्या मुझसे , वो मासूमी से कहते हैं ,
कोई पूछे किस हक से , वो दिल में मेरे रहते हैं ?
१७.अभी तो मिले हैं , घड़ी दो घड़ी,
है लाखों ही दिल में क्यों अरमा हैं जागे?
न कहना किसी से हमारी ये बातें ,
ज़माने की हमको नज़र न लगे...
१८ जो आओ कभी तुम मुहल्ले हमारे ,
तो लैब पे मेरा नाम लेना नहीं ,
हैं बैठे सभी टाक में लोग इसके ,
ये मौका ज़माने को देना नहीं,
१९ शुकर है खुदा का , ये मौका मिला ,
कहें तुमसे दिल का हर शिकवा गिला,
इस्क्ह इज़हार हो शायरी के सहारे ,
तुबे घुट ते कई दिलजले गम के मारे !
२०.है ख़बर हमको, तेरी फितरत बड़ी ही सकत है,
दो घड़ी मेरे लिए भी क्या ज़रा सा वक्त है ?
१. 'चाहिए' और 'चाह' का सिरा तुम न पूछो ,
की दिल और दिमाग का सिला तुम न पूछो ,
जो कह दें की हमने ये दिल से कहा है ,
तो उसकी वजह तुम दिमागों से पूछो !
२. ज़िन्दगी को मिला एक सिरा चाहने का,
वो चाह , जो चाहत है एक सिलसिले की,
फहमी में ग़लत तुम न आना कभी भी ,
ये उल्फत नहीं है , इंसानी दिले की,
मुहब्बत है एक तस्सवुर से मेरे ,
जो मिलता है ले ले के चेहरे नए ,
कभी तो मिले बाहें खोले वो अपने ,
कभी फिर लगाए वो पहरे नए !
३. प्यारा प्यारा प्यार तुम्हारा , प्यारा है इज़हार तुम्हारा ,
दो पल ही , हुआ तो सही , हल्का इक दीदार तुम्हारा ,
तुम आए , तुम यूँ आए , रहा रात झंकार तुम्हारा ,
कुछ तुमने भी दिया हौसला , कुछ दिल गुनाहगार तुम्हारा ....
४. अब आया जीने में मज़ा , बूँदें बरसी अश्कों की अभी,
रही न रहो पास मेरे, यादें मिलती हैं, जो तुमको देखूं कभी ...
५. हँसता है दिल, मुस्कुराती हूँ मैं,
अब हरदम तेरे गीत गाती हूँ मैं,
जो पुकारो मुझे दौडी आती हूँ मैं ,
अब शाम-ओ-सेहर गुनगुनाती हूँ मैं ...
६. कागज़ पे लिखा था शेरों को तुमने,
या दिल पे मेरे कोई नगमा खुदा था ,
जो आया था मिलने ज़रा वक्त पहले ,
था साया मेरा ही या मुझसे जुदा था ?
७.दिल धड़कता तो था पर ऐसे नहीं ,
सांसें चलती तो थी, इस जैसे नहीं ,
किया जादू है कैसा ये तुमने सनम ,
जी थी मैं, हूँ लगती वैसी नहीं !
८. गुज़रता है दिन खुमारी में ,
कट ती है रात बेक़रारी में ,
जाने खुदा वक्त कैसा वो होगा ,
रहती हूँ मैं जिसकी तैयारी में !
९. कैसा ये गुमाँ हमें है आजकल ,
की रहते हैं दुनिया में लोग आज भी,
हमने मौसम से ज़्यादा दिल देखे बदलते,
हम यहीं हैं, कहते हिं लोग आज भी !
१०. गर वक्त-ऐ-शिकायत से आन आना न था,
तौबा इस से बेहतर बहाना न था ?
११. डर है फिर इस्क्ह की सज़ा न मिले ,
हर अदा में छुपा कातिलाना ज़हर ,
ज़रा धीरे धड़क ए मेरे प्यासे दिल,
तुझसे पहले न जाएँ ये साँसें ठहर !
१२.शुक्रिया दोस्त गुल-ऐ-दिल को खिलाया ,
ग़ज़ल से हमारे हमीं को मिलाया ,
न मुमकिन था पाना , गम-ऐ-आशिकाना ,
न जाने जहर क्या हमें है पिलाया !
१३. क्या ग़ज़ल, शायरी भी न भाये हमें,
अब तो हरसू नज़र तू ही आए हमें,
क्या करें ? तुम कहो, दिल गया हाथ से ,
अब तो देखेंगे , जो दिल दिखाए हमें ....
१४ . ज़िन्दगी में कभी मैं तुमसी बन सकूं,
खुल के रोऊँ , कभी खुल के मुस्का सकूं,
ये दिखावे का चेहरा , अब भाता नहीं,
कैसे फेंकूं मगर मुझको आता नहीं.....
१५. निकल हम पड़े हैं , अपनी ही धुन में आज ,
अब देखें जो भी मंज़र , आए निगाह में,
ख़ुद क्या बताएं , फूल या काँटों का बचपना ,
सब बिछ गए हैं आज किस्मतों की राह में ....
१६ मिल सकते हैं क्या मुझसे , वो मासूमी से कहते हैं ,
कोई पूछे किस हक से , वो दिल में मेरे रहते हैं ?
१७.अभी तो मिले हैं , घड़ी दो घड़ी,
है लाखों ही दिल में क्यों अरमा हैं जागे?
न कहना किसी से हमारी ये बातें ,
ज़माने की हमको नज़र न लगे...
१८ जो आओ कभी तुम मुहल्ले हमारे ,
तो लैब पे मेरा नाम लेना नहीं ,
हैं बैठे सभी टाक में लोग इसके ,
ये मौका ज़माने को देना नहीं,
१९ शुकर है खुदा का , ये मौका मिला ,
कहें तुमसे दिल का हर शिकवा गिला,
इस्क्ह इज़हार हो शायरी के सहारे ,
तुबे घुट ते कई दिलजले गम के मारे !
२०.है ख़बर हमको, तेरी फितरत बड़ी ही सकत है,
दो घड़ी मेरे लिए भी क्या ज़रा सा वक्त है ?
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