Wednesday, August 13, 2008

आज - aaj!

संभला है दिल बड़ी मुश्किल से आज ,
लो चल दिए उठ के तेरी महफिल से आज ,

तूफाँ में भी कश्ती हँसती रही ,
लो फिर आके टूटा दिल साहिल पे आज ,

समंदर थी दोस्ती आपकी अब ये जाना ,
हर आँसू में खारापन कुछ शामिल है आज,

अब पूछो मेरी अमीरी के जलवे,
हर आह पे सबकी वाह हासिल है आज,

नहीं खेलना अपने दिल से हमें अब,
ये टूटने के भी नही काबिल है आज !

No comments: